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ज्योतिष  उस विघा का नाम है जिसके द्वारा आकाशीय ग्रहो के माध्यम से भूत ,भविष्य और वर्तमान तीनो आयामो का हाल जाना जा सकता है ।

ज्योतिष शास्त्र का अपर नाम ज्योति:शास्त्र भी है ज्योति शास्त्र का अर्थ हुआ -प्रकाश देने वाला शास्त्र । अर्थात वह शास्त्र ,जो संसार के सुख-दुःख जीवन मरण एव ब्रहाण्ड के अन्धकाराक्छन्न जैसे विभिन्न विषयो पर प्रकाश डालकर उन्हें उजागर करने की उम्मीद रखता है

नक्षत्र एव राशि परिचय

आकाश में सूर्य के परिभ्रमण के मार्ग को क्रांति व्रत कहते है इस क्रान्ति व्रत में प्रकाश पुंजो (तारो ) के बारह समूह है ,जिन्हे राशि चक्र कहते है यह ग्रहो की एक पट्टी है जो बारह राशियों में विभक्त्त है

बारह राशियों में कुल 27 नक्षत्र है नक्षत्र भी तारे ही है ; लेकिन ये साधारण तारो की तरह टिमटिमाते नहीं है । बल्कि लगातार चमकते रहते है इनकी चमक बहुत अधिक होती है । एक-एक नक्षत्र में कई-कई तारे होते है । ये नक्षत्र समूह मिलकर जो आकृति बनाते है । उसी के अनुसार राशि के नाम रखे गए है ।

क्रमांक नाम चिन्ह
1 मेष मेढ़ा
2 वृष बैल
3 मिथुन जुड़वा
4 कर्क केकड़ा
5 सिंह शेर
6 कन्या कुमारी
7 तुला तराजू
8 वृश्चिक बिच्छू
9 धनु धनुधारी
10 मकर मगरमच्छ
11 कुम्भ घड़ा
12 मीन मछली

 

क्रमांक नक्षत्र
1  अश्विनी
2 भरणी
3 कृतिका
4 रोहिणी
5 मार्गशीर्ष
6 आर्द्रा
7 पुनवर्सु
8 पुष्य
9 आश्लेषा
10 मघा
11 पूर्व फाल्गुनी
12 उत्तर फाल्गुनी
13 हस्त
14 चित्रा
15 स्वाति
16 विशाखा
17 अनुराधा
18 ज्येष्ठा
19 मूल
20 पूर्वाषाढ़ा
21 उत्तराषाढ़ा
22 श्रवण
23 धनिष्ठा
24 शतभिषक
25 पूर्वभाद्र्पदा
26 उत्तरभाद्रपदा
27 रेवती
27 रेवती
27 रेवती

पूर्णिमा ,से अमावस की और जाने को कृष्ण पक्ष और अमावस से पूर्णिमा की और जाने को शुक्ल पक्ष कहते है । साधारण भासा में हम कह सकते है की जब चन्द्रमा बढ़ता है उन दिनों को शुक्ल पक्ष और जब चन्द्रमा घटता है, उन दिनों कृष्ण पक्ष कहते है दोनों पक्षों के लिए ज्योतिष शास्त्र में ‘शुदी ‘ और ‘बड़ी’ शब्दों का भी प्रयोग किया जाता ह

 

 क्रमांक   ग्रह  दिन
1   बुध 88 दिन –  2 महीने 18 दिन
 2  शुक्र  225 दिन – 7 महीने 15 दिन
 3  पृथ्वी 365 दिन – 12 महीने
 4  मंगल 367 दिन -1 साल 10 महीने 22 दिन
 5  वृहस्पति  4333 दिन – 12 साल
 6  शनि  10759 दिन – 30 साल

ग्रह स्थिति एक राशि में

 

क्रमांक ग्रह  दिन
 1  सूर्य 30 दिन
2 चन्द्रमा 2 1/2
3  मंगल  45 दिन
4  बुध  27 दिन
5  गुरु  1 साल
6  शुक्र  30 दिन
7 शनि  30 दिन
8  राहु /केतु 18 महीने

 

पंचांग परिचय

किसी समय को व्यक्त करने तिथि ,वार ,नक्षत्र , योग और  कारण का व्यवहार किया जाता है । इस कारण पांच अंगो का जिस पुस्तक में परिचय हो उसे पंचांग कहते है । ज्योतिष में रूचि रखने वालो को पंचांग देखना का अभ्यास अवश्य करते रहना  चाहिए ।

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