|| श्री हनुमान भजन ||
(स्थायी)
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार।
पवनसुत विनती बारम्बार॥
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार।
पवनसुत विनती बारम्बार॥
(अंतरा – 1)
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता, दुःखियों के तुम भाग्य विधाता।
प्यासी अँखियाँ दर्शन को तरसे, भर दो झोली बारम्बार॥
पवनसुत विनती बारम्बार॥
(अंतरा – 2)
राम के काज संवारे तुमने, मेरे काज संवारो।
आया हूँ मैं शरण तिहारी, मेरे कष्ट निवारो॥
पवनसुत विनती बारम्बार॥
(अंतरा – 3)
संकट मोचन नाम तिहारो, संकट से मुझे पार उतारो।
तेरे होते नाथ मेरे, क्यूँ मैं भटकूँ द्वार-द्वार॥
पवनसुत विनती बारम्बार॥
(अंतरा – 4)
लाये संजीवन बूटी तुमने, लक्ष्मण के प्राण बचाये।
जब भी भक्तों पे भीड़ पड़ी है, तुम ही तो आये सहाई॥
पवनसुत विनती बारम्बार॥
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार।
पवनसुत विनती बारम्बार॥
|| दोहा ||
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
सियावर रामचन्द्र की जय! पवनसुत हनुमान की जय!